Friday, August 10, 2012

कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाये.



मेरे प्रिय आत्मन मित्रों .
आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी है . आप सभी को तथा इस धरा के हर व्यक्ति को इस पावन पर्व की शुभकामनाये.
श्री कृष्ण मेरे आराध्य है , तथा प्रेम तथा भक्ति के प्रकाश रूप है . और हम हृदयम कम्यून में हर पल इसी उत्सव को मनाते है .
आप सभी को इस महान उत्सव का आनंद प्राप्त हो .
प्रणाम .
हरे कृष्ण !!!!

Wednesday, July 25, 2012

गीतांजलि : रविन्द्रनाथ टैगोर

गीतांजलि : रविन्द्रनाथ टैगोर

मित्रो , हममें से शायद ही कोई होंगा , जिसने इस कृति को नहीं पढ़ा है . और अगर नहीं पढ़ा है तो मेरा निवेदन है कि जरुर ही पढ़ ले . इसलिए नहीं कि इसे सब महान कृति मानते है . ये है ही एक महान कृति.

आप पढेंगे तो पता चलेंगा कि कवि गुरु ने कितने अच्छे शब्दों में इश्वर के प्रति अपनी भक्ति को रचा हुआ है . रविन्द्रनाथ  टैगोर लिखित गीतांजलि मात्र एक पुस्तक नहीं बल्कि एक महाकाव्य रूपी ग्रंथ है। और ये कहने में कोई संकोच भी नहीं है कि इस पुस्तक के कारण दुनिया के साहित्यकारों ने भारत के उच्च साहित्य लेखनी को जाना.

मैंने इसे कई बार पढ़ा है और मुझे इसके सारे गीत बहुत पसंद है . और सिर्फ इसलिए भी मैं रविन्द्र संगीत को सुनता हूँ और बहुत पसंद करता हूँ. 

गीतांजलि में एक गीत है : चाई गो आमि तोमारे चाई : कविगुरु इसमें प्रभु को पुकारते है .

ऐसे ही सुन्दर गीतों से ये पुस्तक सजी हुई है . आप सभी से निवेदन  है कि इसे एक बार फिर से पढ़े और प्रभु के प्रति अपनी भक्ति को कोमल भाव दे.

प्रणाम
आपका
विजय

Monday, July 23, 2012

हे राम .....!

मेरे प्रिय मित्रों ,

कभी कभी बहुत तकलीफ होती है . तब ऐसे वक्त में सिर्फ एक ही काम कीजिये . अपने दिल पर हाथ रखिये और अपने प्रभु का नाम लीजिए . और कहिये . हे भगवान , मेरा सब कुछ तू ही . मैं भी तेरा , मेरा जीवन भी तेरा. हे राम मेरे .. मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखना .

देखिये कैसे जादू होता है ..

बहुत से प्रेम भरे आलिंगनो के साथ
आपका अपना 
विजय 

Friday, July 20, 2012

बच्चो जैसे बने

प्रिय मित्रो ,

पिछले दिनों मैं बाईबिल पढ़ रहा था . उसमे प्रभु ईशा से उनके शिष्य पूछते है कि स्वर्ग में कैसे जाए . ईशा एक बालक को थामकर कहते है कि बच्चो जैसे बने. स्वर्ग अपने आप ही मिल जायेंगा .


इस घटना में कितनी बड़ी सच्चाई है दोस्तों. बच्चे मन के सच्चे होते है , भोले होते है . सारा जगत ही उनमे समाया हुआ होता है .


कितना अच्छा  रहेंगा यदि हम बच्चो के भावो को और उनकी सच्चाई को अपनाए .

सोचिये ....और प्रयास कीजिये   !!!

एक बेहतर इंसान बनने का रास्ता बच्चो के मूल भाव को स्वीकार करने से ही आयेंगा.


धन्यवाद और प्रणाम

आपका
विजय

जियो जी भर के ..

मेरे प्रिय मित्रो ,

कल मैं शाम को बहुत उदास था, राजेश खन्ना की मृत्यु के कारण . मुझे याद है , इंजीनियरिंग के पढाई के वक़्त मैं उनकी फिल्मो के गाने गाता था. लेकिन आज आनंद चला गया . लेकिन आनंद जैसे किरदार कभी नहीं मरते ..हमारे दिलो में रहते है . मैंने कल उनकी फिल्मो के गाने अपने दोस्तों को सुनाकर उन्हें श्रधांजलि दी .

कल एक बात मुझे समझ में आई कि राजेश को किसी और कारण से ज्यादा उनके अकेलेपन ने मारा है .

दोस्तों , हम सब कहीं न कहीं अकेले होते है अपनी ज़िन्दगी में. और कभी कभी ये अकेलापन हमारे दिल और दिमाग में घर बना लेता है . और तब धीरे धीरे हमें हमारा ही अकेलापन मारने लगता है . राजेश के साथ यही हुआ.

आज मैं आपसे यही कहना चाहूँगा कि अकेलेपन को घर मत बनाने दे. अपने आपको किसी भी creative skills  में डुबो दे.. दुनिया आपकी है . जमीन आपकी है , आसमान आपका है . चाँद सूरज तारे और ये सुन्दर सी प्रकृति आपकी है .. बस अपने अकेलेपन को इन सब चीजो से भर दे , जो भगवान् में हमें दिया हुआ है . जीवन को भरपूर जिए .

जैसे कि राजेश खन्ना , आनंद फिल्म में कहते है कि ज़िन्दगी बड़ी होनी चाहिए , लम्बी नहीं .. मैं भी यही बात आप सभी से कहता हूँ. जियो जी  भर के .. खुशिया आपके आस पास ही है . आपके भीतर ही है.

प्रणाम
आपका सभी का
विजय

Thursday, July 19, 2012

अनुभूतियाँ

मेरे प्रिय मित्रों / आत्मन

हम अक्सर अपने कर्मो को करने के चक्कर में कुछ गलत कर्म भी कर लेते है और कुछ अनुचित शब्दों का प्रयोग भी कर लेते है . लेकिन जैसे कि माया अन्जेलो ने कहा है ,कि , लोग भले ही  हमारे कर्म और हमारे शब्द भूल जाए , लेकिन कोई ये नहीं भूलता कि , हमने उन्हें कैसी अनुभूतियाँ दी .

आज , मैं आप सबसे निवेदन करता हूँ कि अपने शब्दों को और अपने कर्मो को संवेदनशील बनाए रखे. क्योंकि , वक्त तो गुजरता ही रहता है ...और लोग हर अनुभूति को संजोये रखे रहते है .. अच्छा करिये अच्छा ही होंगा .. प्रेम पाने के लिये सिर्फ प्रेम ही करे..

आप सभी  का धन्यवाद.
आप का जीवन शुभ हो
असीम प्रेम से भरे आलिंगनो के साथ
आपका
विजय

Saturday, July 7, 2012

ख़ुशी और खुश होना

प्रिय मित्रो :
शुभप्रभात और जीवन की शुभकामनाये !!!


आज बहुत सीधी सी बात कहूँगा आप से. जीवन में छोटी छोटी बातो में खुशियाँ ढूंढें . क्योंकि अक्सर बड़ी बड़ी चीजे हमें दुःख देती है . इसलिए बस छोटी छोटी बाते, जैसे बच्चो का हँसना और मुस्कराना , अपने घर के पौधों में फूलो  के रंगों को देखना ,  आकाश में छाए बादलो को देखना , बारिश की बूंदों में नहाना, सुबह की हवा में पूरे फेफड़ो में जी भर कर सांस लेना , किसी सुनसान जगहो  पर किसी मंदिर के आगे झुक जाना , हर किसी को माफ़ कर देना , किसी बूढ़े से पेड़ को अपनी बांहों में भर लेना , सड़क पर रुक कर दुनिया को देखना .. और वो सारी चीजो में जीवन को ढूंढ कर मस्त होना जो हमें ईश्वर ने मुफ्त में दी है ... जीवन खुश होने का नाम है . आप तो बस हर बात में खुश होना सीख लीजिये मेरी तरह.. जैसे मैं आप सबकी संगत में खुश हूँ. जीवन से खुश हूँ....!


याद रखे . ख़ुशी और खुश होना आपका अधिकार है . जो की ईश्वर से आपको मिला है .. 


आपका
अपना
विजय

Tuesday, July 3, 2012

आप सभी को गुरुपूर्णिमा की ढेर सारी शुभकामनाये !






मेरे प्रिय आत्मन ;

आप सभी को गुरुपूर्णिमा की ढेर सारी शुभकामनाये !

गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरूर देवो महेश्वराय।
गुरुर्साक्षात परब्रह्म तस्मै ‍श्री गुरुवे नम:।।

मित्रों, गुरू को साक्षात परब्रह्म की संज्ञा दी गई है। और बिन गुरु ज्ञान नाही होवत है . संत कबीर ने भी यही कहा है कि नैया पड़ी मंझधार गुरु बिन कैसे लागे पार !

हम सभी जीवन के इस संग्राम में अध्यात्म की खोज में एक अनंत यात्रा पर चल रहे है . हृदयम के इस समूह में आप सभी हर दिन , निरंतर इसी यात्रा में दूसरे सहभागियो के साथ बहुत से गुरुओ के द्वारा दिए गये ज्ञान को प्राप्त कर रहे है .

मैं आप सभी को इस यात्रा की बधाई और शुभकामनाये देता हूँ. गुरु आपके जीवन में प्रकाश लाते है . जितना आप अपने गुरु को समर्पित होंगे उतना ही आप ईश्वर के करीब पहुंचेंगे और इस प्रक्रिया में आप अपने गुरु के निकट होंगे. भक्ति की राह में गुरु का होना बहुत जरुरी है .

भगवान कृष्ण के १६ गुरु थे. सोचिये .भगवान भी बिन गुरु के नहीं रहे फिर हम क्या . इसलिए किसी न किसी गुरु के आँचल को थाम लीजिए और अनंत यात्रा में उनका आशीर्वाद प्राप्त करे.

मैं बहुत सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे ओशो , रविशंकर, मुरारी बापू, दलाई लामा इत्यादि गुरुओ का आशीर्वाद मिला . और सबसे ऊपर तो मेरे प्रभु श्री साईं ही है .जो गुरु भी है , मित्र भी  है .और देवता भी .

अंत में एक बार फिर से आप सभी को गुरुपूर्णिमा की बधाई .

ॐ सांई राम...!

आपका
विजय

Wednesday, April 11, 2012

ईश्वर

सच तो यही है कि मित्रों ईश्वर मन में बसा हुआ है . उसका वजूद का ख्याल हमें किसी भी सुख में नहीं आता है ,जब दुःख हो तो तुरंत ही उसका ख्याल आता है . अब चूंकि सुख और दुःख दोनों ही मन की ही देन है , इसलिए ईश्वर का होना और नहीं होना वो भी मन की ही देन है . जाकी रही भावना जैसी ,प्रभु मूरत देखी तिन तैसी..! 
प्रणाम ..

Wednesday, April 4, 2012

" सब ठीक ही होंगा "

मेरे प्रिय आत्मन ;

[ आत्मन शब्द मैंने ओशो के प्रवचन से लिया है , पहले मैं मित्रों कह कर सम्बोदित करता था , अब से आत्मन ही कह कर आप सभी को पुकारूँगा,. क्योंकि आपकी और मेरी आत्मा एक ही परमात्मा का अंश है . ]


नमस्कार ;

अक्सर हम शिकायत करते है की मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ , लेकिन कुछ समय बीत जाने के बाद लगता है की जो हुआ अच्छा ही हुआ , जो होता है अच्छे के लिए ही होता है . ईश्वर के बनाए हुए निजाम में थोड़ी देर के लिए लगता है की गलत हुआ है , लेकिन यही सही होता है ,जो कि कुछ देर के बाद पता चलता है . 

समय सब दर्दो की दवा है .. ...!!!

इसलिए उस परमपिता पर विश्वास रखिये . " सब ठीक ही होंगा "

ये ही आज का महामंत्र है : " सब ठीक ही होंगा " इसे अपने जीवन में स्वीकार करिए .

धन्यवाद.
प्रणाम और प्रेम भरे आलिंगनो के साथ
आपका
विजय

Friday, March 23, 2012

प्रभुकृपा हमेशा हम सब पर बनी रहे !

 
जो इच्छा करिहो मन माही,                                                                                 
हरि प्रसाद कछु दुर्लभ नाही,

प्रभु के परम इच्छा और आशीर्वाद ही हमारे जीवन का सहारा है .
बस उनकी कृपा हमेशा हम सब पर बनी रहे.

प्रणाम
विजय

शुभकामनाएँ !!!


आप सभी मित्रो को तथा आपके परिवार के सदस्यों को गुढी पाडवा ,उगादी , तेलगू नववर्ष, कन्नड़ नववर्ष , चेटीचंड ,नवरेश ,चैत्र सुख्लदी, नंदना नाम नवसम्वतसर-2069 की हार्दिक शुभकामनाएँ !!!

ईश्वर अपने आशीर्वादों से आपके जीवन में ढेर सारी खुशियाँ व सुख शान्ति देवे. आपके परिवार में हमेशा धन धान्य की बढोतरी रहे .आपके बच्चे तथा परिवार के अन्य सदस्य स्वस्थ रहे .

प्रणाम
विजय

Friday, February 24, 2012

मृत्यु के पहले अवश्य जी ले.....!!

मेरे प्रिय मित्रो ;
नमस्कार !
जब हम मृत्यु को प्राप्त होंगे , तब सिर्फ तीन ही प्रश्न विचारणीय होंगे ::

१. क्या हमने जीवन जिया
२. क्या हमने प्रेम किया
३. क्या हमने इस संसार को वापस कुछ दिया /कुछ बांटा

और यदि इन में से एक भी या तीनो प्रश्नों के उत्तर यदि "न" में है , तो हमारा सारा जीवन जीना ही व्यर्थ है . और यदि तीनो का उत्तर यदि " हाँ " में है तो फिर कोई कामना ही न रखो मन में . बस जीवन तो जी ही लिया है हमने . 
लेकिन यदि उत्तर " न " में है तो घबराने की कोई बात ही नहीं है मित्रो ,क्योंकि यदि आप इस सन्देश को पढ़ रहे है तो आप अभी जीवित है. यानी कि ईश्वर ने कुछ मौके और रख छोड़े है ,आपके लिए कि आप अपना जीवन सार्थक बनाए . बस उन्ही मौको को खोजिये . लोगो को प्रेम करिए . इस संसार को कुछ तो वापस जरुर कीजिये . और खुश रह कर जीवन को जिये . [ क्योंकि जीवन तो जीना ही है , जब तक की मृत्यु घटित नहीं होती है , तो क्यों न इसे ख़ुशी से जिए ] [ यहाँ मैं सुख की बात नहीं कर रहा हूँ मित्रो . सुख का ख़ुशी से कोई लेना -देना नहीं है ]. 
बस ख़ुशी आपकी अपनी बंदगी है , आपकी अपनी रवानगी है . यही जीवन है और यही सत्य है .

प्रणाम
विजय

Friday, February 3, 2012

मैं यह जान गया हूँ .....!!!

मैं यह जान गया हूँ कि कितना ही बुरा क्यों न हुआ हो और आज मन में कितनी ही कड़वाहट क्यों न हो, यह ज़िंदगी चलती रहती है और आनेवाला कल खुशगवार होगा.

मैं यह जान गया हूँ कि किसी शख्स को बारिश के दिन और खोये हुए लगेज के बारे में कुछ कहते हुए, और क्रिसमस ट्री में उलझती हुई बिजली की झालर से जूझते देखकर हम उसके बारे में बहुत कुछ समझ सकते हैं.

मैं यह जान गया हूँ कि हमारे माता-पिता से हमारे संबंध कितने ही कटु क्यों न हो जाएँ पर उनके चले जाने के बाद हमें उनकी कमी बहुत शिद्दत से महसूस होती है.

मैं यह जान गया हूँ कि पैसा बनाना और ज़िंदगी बनाना एक ही बात नहीं है.

मैं यह जान गया हूँ कि ज़िंदगी हमें कभी-कभी एक मौका और देती है.

मैं यह जान गया हूँ कि ज़िंदगी में राह चलते मिल जाने वाली हर चीज़ को उठा लेना मुनासिब नहीं है. कभी-कभी उन्हें छोड़ देना ही बेहतर होता है.

मैं यह जान गया हूँ कि जब कभी मैं खुले दिल से कोई फैसला लेता हूँ तब मैं अमूमन सही होता हूँ.

मैं यह जान गया हूँ कि हर दिन मुझे किसी को प्यार से थाम लेना है. गर्मजोशी से गले मिलना या पीठ पर दोस्ताना धप्पी पाना किसी को बुरा नहीं लगता.

मैं यह जान गया हूँ कि लोग हमारे शब्द और हमारे कर्म भूल जाते हैं पर कोई यह नहीं भूलता कि हमने उन्हें कैसी अनुभूतियाँ दीं.

मैं यह जान गया हूँ कि मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है.
 
 मैं यह जान गया हूँ कि मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है.

Monday, January 30, 2012

जीवन जीने की कला ......!!!!

प्रिय मित्रों ;
नमस्कार

जीवन जीना भी एक कला है . अगर हम इस जीवन को अपनी किसी ARTWORK की तरह जिए तो  बहुत सुन्दर जीवन जिया जा सकता है .

जीवन एक स्वपन है . एक यात्रा है . एक निरंतर कोशिश है. एक पाने-खोने-पाने के मायाजाल में जीने और उसमे से निकलने की बदिश है .एक आस्था है . एक विश्वास है . एक सम्पूर्णता है . जीवन एक अनंत धडकन है . जीवन बस एक जीवन है.

मेरी आप सभी से ये उन्मुक्त प्रार्थना है कि , आप अब से अपने जीवन के हर क्षण को किसी कला को अंजाम देने की तरह जिए , फिर देखिये आपका जीवन कितना सुन्दर हो जायेंगा .

प्रणाम
प्रेम भरे जीवन के आलिंगनो के साथ .
आपका
विजय



Friday, January 27, 2012

सुख और दुःख


मेरे प्रिय ह्रदयम मित्रो :

सुबह की शुद्ध सुर्यकिरनो  के साथ आपका ह्रदयम पर स्वागत करता हूँ.
पिछले दिनों मुझे एक मित्र ने पुछा ," स्वामी जी , इस जगत में अच्छे लोगो को ही दुःख ज्यादा क्यों होते है ? इसका उत्तर दिजियेंगा ! "

मैंने उन्हें दो उत्तर दिए जो मैं आप सबके साथ बाँट रहा हूँ .


पहला उत्तर : प्रिय मित्र . ये ईश्वर के द्वारा बनाया गया DEFAULT MECHANISM है  ,स्वंय भगवान भी जब मनुष्य रूप में यहाँ अवतरित हुए , तो उन्हें भी दुःख भोगना पढ़ा .
ज़हर ,सुकरात को ही पीना पढ़ा था
सूली पर जीसस को ही चढ़ना पढ़ा था
वनवास में श्री राम को ही जाना पढ़ा था .
ईश्वर की बनायी हुई इस दुनिया में युगों युगों से ये घटित हो रहा है , कि अच्छे इंसानों को ही दुःख ज्यादा प्राप्त होते है और उन्हें ही असमय मृत्यु को स्वीकार करना पढता है .

दूसरा उत्तर : मित्र , हम सब एक अजीब से MENTAL PERCEPTIONS  के साथ जी रहे है . दरअसल जो दुःख अच्छे लोगो को प्राप्त होते है , वो दुःख बुरे लोगो भी प्राप्त होते है लेकिन जहाँ बुरे लोगो को ये दुःख जीवन की अन्य घटनाओं की तरह एक और घटना प्रतीत होती है , क्योंकि वे खुद बुरे कार्यो में लिप्त रहते है . वहीँ अच्छे लोगो को ये दुःख कचोटते है और तकलीफ देते है . दूसरी बात , कि जिस तरह से  अच्छे लोग और बुरे लोगो  की विवेचना हम खुद करते है , अच्छे और बुरी घटना की विवेचना भी हम खुद करते है . दरअसल अदालत हम खुद ही बनाते है और सजा भी खुद ही देते है .

इसलिए इस संसार में , भाग्य से हमें जो भी मिलता है उसे ईश्वर का प्रसाद ही समझ कर उसे ग्रहण कर लेना चाहिए और जीना चाहिए .
जिस तरह से जीसस ने सूली पर चढ़ना  स्वीकार किया .
जिस तरह से श्री राम ने वनवास पर जाना स्वीकार किया .
उसी तरह से हमें जो भी घटित होता है , उसे अपने भाग्य और जीवन का एक हिस्सा समझ कर जीवन के अगले क्षण की ओर अग्रसर होना चाहिए .

प्रणाम

प्रेम तथा जीवन से भरे आलिंगनो के साथ
आपका
विजय

 

Thursday, January 26, 2012

हम अपने हृदय में झांके

मेरे प्रिय हृदयम मित्रों ;

सांध्य नमस्कार !

ये अक्सर होता है कि , हम सारे संसार में बहुत कुछ ढूंढते है , दूसरों को बारे में सोच- सोच कर निर्णय लेते है . ये भी , हम सोचते है कि , हम सब कुछ जानते है .. लेकिन क्या वाकई ऐसा होता है  कि हम सब कुछ जानते है . दरअसल सबसे ज्यादा जरुरी है , कि हम अपने हृदय में झांके और अपने आप को सबसे पहले समझे , तब ही कहीं जाकर हम दूसरों को समझने की थोड़ी सी बुद्धि  प्राप्त कर पायेंगे .

यही जरुरत है , इस क्षण की . इस आयु की . इस जन्म की .
कि ,हम अपने ह्रदय में झांककर अपने आप को पहले जान ले .
इससे ईश्वर को समझना आसान हो जायेंगा

प्रणाम

प्रेम तथा जीवन से भरे आलिंगनो के साथ
आपका
विजय

Friday, January 20, 2012

हर दिन की शुरुवात....!!




मेरे प्यारे दोस्तों, आज का दिन एक और नया दिन है आपके जीवन में .इसके लिए प्रभु को धन्यवाद देना न भूले और इस दिन की तथा हर दिन की शुरुवात कुछ इस तरह से करे.
१.      आँखे बंद करके दुनिया के लिए प्रार्थना करे.
२.     मुस्कराईये
३.     अतीत को भूल जाए.
४.     खुद के सहित सभी को माफ़ करे.
५.    दिल खोलकर हंसिये.
६.      धीरे से kiss  करे.
७.    बच्चो की तरफ देखकर हाथ हिलाए.
८.     प्रकृति में समा जाईये.
९.      अपने काम में १००%  effort दीजिये.
१०.  अपने दिल, दिमाग और शरीर को शांत रखे .
११.  सबके प्रति दयालु बने रहे.
१२. प्रकृति में हर किसी के लिये प्रेम रखे .
और हाँ , सबसे मुख्य बात अपने जीवन से प्रेम करना न भूले .
धन्यवाद और प्रणाम
विजय 

Tuesday, January 10, 2012

how to bury the past and move on:


My Dear Souls;

Today I would like to suggest few tips on how to bury the past and move on:

  1. Understand that nothing is permanent in life.
  2. Things, people and relationships do change, and we should be ready to accept this fact.
  3. It takes huge time involvement and investment to understand people, so don’t rush into a serious relationship while the scars of the first one are still fresh
  4. Don’t spoil or throw away your own happiness and joy in life, because of the mistakes, faults and imperfections in others.
  5. Relationships collapse due to expectations and very often less realistic ones. so if you want to have a lasting relationship, have minimum expectations
  6. Don’t remain obsesses with what you have given in the relationship.
  7. Also celebrate what you have received, what you have given was also a part of a happy , joyful, loving relationship , so don’t hold on to it, let go and move on !

I am sure these valuable tips will help you all to overcome your personal issues on past and relationship. I can only wish a great life for all my members & friends.

Pranaam
Love, Light & Hugs
Vijay

Thursday, November 24, 2011

HAPPY THANKSGIVING





Hrudayam wishes all members and their families a very happy Thanksgiving Day .
Today is a day of celebration of happiness of harvest and other joys of life.

I have only prayer and message for you all :
Please say thanks to GOD first than to your parents and than to all your friends and relatives and thus the thanksgiving message spreads .BUT try to get THANKS from some unfortunate brothers and sisters of our society by helping them , by supporting them , since GOD has blessed you with all the good things of life: please share some part with the poor and needy and let me tell you; the moment you get a THANK YOU from a needy person/family , whom you helps - that will be the moment of LIFE . That will be the moment of JOY , that will be the moment of Happiness and that will be moment of THANKSGIVING !!!

GOD bless You all..!!!

Pranaam
Love, Lights & Hugs
VIJAY

Friday, October 14, 2011

मन के पाँव.....!!!


प्रिय मित्रों ;

मन के दो पाँव होते है .. एक अतीत में और दूसरा भविष्य में . , और यही सबसे ज्यादा गडबडी होती है , क्योंकि मन कभी भी वर्तमान में नहीं जीना चाहता है . या तो वो अतीत की बातो से खुश या दुखी होते रहता है या फिर भविष्य की कल्पनाओं में उलझा होता है . और चूँकि इस मन का अस्तित्व हममे  होता है ,हमारा पूरा जीवन इस मन की वजह से प्रभावित होते रहता है .

अब सवाल उठता है कि क्या करे. कैसे इस मन को काबू में करे. ये इस संसार का सबसे कठिन काम है . मन की चंचलता उसे काबू में नहीं होने देती .

मैं एक सुन्दर सा उपाय बताता हूँ , जो कि मैं आजमाता हूँ .और वो उपाय है मन में अपने आपको नहीं उलझने देना. जितना आप इसको रोकने की कोशिश करेंगे , उतना ही ये उपद्रव करेंगा . आप इसे छोड़ दीजिए . शांत होने की कोशिश करे. और इससे अलग होने की चेष्ठा करे. आपका ध्यान मन से हटते ही मन शांत हो जायेंगा . और फिर आप वर्तमान को सुन्दर और स्वस्थ बना सकते है .. थोडा समय लगेंगा , लेकिन ये होंगा जरुर . और एक बार आपने इसे कर लिया तो बस फिर कोई बात ही नहीं ...!!!

आपका जीवन शुभ हो , यही मंगल कामना है

आपका
विजय

Thursday, July 28, 2011

" माँ "

 " माँ " से बढ़कर दुनिया में कोई और अच्छा संबोधन नहीं है और न ही , माँ से बढकर कोई और दूसरा व्यक्ति !

लेकिन जब हम बच्चे रहते है , तब हमें माँ बहुत प्यारी  लगती है , जब बड़े हो जाते है तो वही माँ हमें हमारे thoughts , actions , behavior और ज़िन्दगी में interference करती हुई नज़र आती है . जैसे जैसे हम बड़े हो जाते है , हम पाते है की , हमारे पास माँ के लिए न शब्द बचते है , और न ही बाते, और न ही समय !!


हम भूल जाते है की हमें ज़िन्दगी देने वाली ही माँ है . और जब  माँ नहीं रहती है तो , उसकी बड़ी याद आती है . जब सामने रहती है तो उसकी तरफ ध्यान ही नही जा पाता है !


प्रिय मित्रो , अगर माँ है तो उसके पास जाओ और उसे भी प्यार दो . उसकी झोली हमारे लिए कभी भी प्यार से खाली नहीं होती है . बस हम ही बदलने लग जाते है !!


समय रहते , अपनी माँ को ये अहसास दिलवाओ कि तुम हो उसके लिए !!! हमेशा !!!!


- स्वामी प्रेम विजय

Friday, July 22, 2011

प्यार और मित्रता


प्रिय मित्रों ;

आज मैं आप सभी से कुछ कहना चाहूँगा .

सारी
ज़िन्दगी हम प्यार और मित्रता की तलाश करते रहते है , और जैसे ही हमें प्रेम और मित्रता मिल जाती है , हम उसे अपने दो कौड़ी के दिमाग और गज भर लम्बी जबान से सर्वनाश कर देते है .

और
ये लगभग हम सभी के साथ ही होता है . और इसका मुख्य कारण है हमारा दिमाग .हम अपने pre -loaded thought processes को अपनी दोस्ती और अपने प्रेम पर लागू करते है और एक सुन्दर से जीवन का कबाड़ा कर डालते है .

ये
ध्यान रखे की जीवन में प्रेम और दोस्ती बहुत ही मुश्किल से मिलती है . लेकिन दोस्ती या प्रेम करना और इन दोनों को निभाना , वाकई बहुत मुश्किल का कार्य होता है . हम दिल से निभाना चाहते है लेकिन हमारे दुष्ट दिमाग का क्या करे.. वह इन दोनों में हस्तक्षेप करता है और इस तरह से जीवन की सबसे मूल्यवान वस्तु हमारे हाथ से निकल जाती है .

याद रखे की प्रेम या दोस्ती में दुनियादारी या व्यवहार की कोई जरुरत नहीं होती है ,
वहां तो सिर्फ आप दोनों ही होते है .

इसलिए
मेरी विनंती है आप सभी से , कृपया अपना दिमाग को इन दो बातो में न लाये और न ही अपनी जुबान को अधिकार दे कि वो इन दोनों भावो में कुछ कहे. याद रखे , इन दोनों बातो में शब्दों की कोई जरुरत ही नहीं है , यहाँ किसी भी व्यवहार की जरुरत नहीं है , क्योंकि प्रेम और मित्रता में ईश्वर का सच्चा वास होता है

प्रणाम

स्वामी प्रेम विजय




Wednesday, May 11, 2011



मेरे प्यारे दोस्तों, आज का दिन एक और नया दिन है आपके जीवन में .इसके लिए प्रभु को धन्यवाद देना न भूले और इस दिन की तथा हर दिन की शुरुवात कुछ इस तरह से करे.
१.      आँखे बंद करके दुनिया के लिए प्रार्थना करे.
२.     मुस्कराईये
३.     अतीत को भूल जाए.
४.     खुद के सहित सभी को माफ़ करे.
५.    दिल खोलकर हंसिये.
६.      धीरे से kiss  करे.
७.    बच्चो की तरफ देखकर हाथ हिलाए.
८.     प्रकृति में समां जाईये.
९.      अपने काम में १००%  effort दीजिये.
१०.  अपने दिल, दिमाग और शरीर को शांत रखे .
११.  सबके प्रति दयालु बने रहे.
१२. प्रकृति में हर किसी के लिये प्रेम रखे .
और हाँ , सबसे मुख्य बात अपने जीवन से प्रेम करना न भूले .
धन्यवाद और प्रणाम
विजय

Wednesday, January 12, 2011

स्वामी विवेकानंद

दोस्तों, स्वामी विवेकानंद मेरे आदर्श है , उनका जन्मदिन १२ जनवरी को है .ये कविता उन्ही को समर्पित है . मैं ये मानता हूँ की अगर उनके बताये हुए संदेशों में से अगर हम एक भी संदेश आत्मसात करें , तो हमारे जीवन में ढेर सारे changes और positive aura का प्रवेश हो जायेगा . मेरा उस महान संत को नमन है और आपसे अनुरोध है कि , अगर हो सके तो इस नए वर्ष में उनका ,कम से कम एक जीवन संदेश को अनुग्रहित करें.





स्वामी विवेकानंद

आज भी परिभाषित है
उसकी ओज भरी वाणी से
निकले हुए वचन ;
जिसका नाम था विवेकानंद !

उठो ,जागो , सिंहो ;
यही कहा था कई सदियाँ पहले
उस महान साधू ने ,
जिसका नाम था विवेकानंद !

तब तक न रुको ,
जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो ...
कहा था उस विद्वान ने ;
जिसका नाम था विवेकानंद !

सोचो तो तुम कमजोर बनोंगे ;
सोचो तो तुम महान बनोंगे ;
कहा था उस परम ज्ञानी ने
जिसका नाम था विवेकानंद !

दूसरो के लिए ही जीना है
अपने लिए जीना पशु जीवन है
जिस स्वामी ने हमें कहा था ,
उसका नाम था विवेकानंद !

जिसने हमें समझाया था की
ईश्वर हमारे भीतर ही है ,
और इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है
उसका नाम था विवेकानंद !

आओ मित्रो , हम एक हो ;
और अपनी दुर्बलता से दूर हो ,
हम सब मिलकर ; एक नए समाज ,
एक नए भारत का निर्माण करे !
यही हमारा सच्चा नमन होंगा ;
भारत के उस महान संत को ;
जिसका नाम था स्वामी विवेकानंद !!!




Saturday, January 1, 2011

कभी भी कुछ भी नहीं ठहरता है ..... NOTHING LASTS FOREVER.....


दोस्तों, आप सभी को नववर्ष  की शुभकामनाये.. दोस्तों.. जीवन में ,कभी भी कहीं भी कुछ  भी नहीं ठहरता है .. NOTHING REALLY LASTS FOREVER..  जो आज है  वो कल नहीं है... लेकिन  जीवन की इस निरंतरता की प्रक्रिया में हम ये सबसे महतवपूर्ण बात भूल जाते है .. की NOTHING IS PERMANENT .WE ARE PART OF A CONTINUOUS CHANGE PROCESS. लेकिन एक बात जो मैं आप  सब से कहना चाहूँगा की आज और आज से शुरू होने वाले हर दिन  में जितने भी पल आप जियेंगे ... उसमे और कुछ करे या करे , बस दूसरो के साथ आप मीठा मीठा बोलिए .. चाहे उस इंसान के साथ आपके कितने भी DIFFERENCES हो . क्योंकि क्रोध, अहंकार, नफरत बहुत ही POWERFUL NEGATIVE EMOTIONS है और जब आप इन EMOTIONS के SPELL में होते है तब आपकी भाषा और आवाज दोनों ही संयम छोड़ देते है और दुसरे इंसान पर इसका बहुत ही बुरा असर पड़ता है  , आपके उस वक्ती OUTBURST की वजह से , उसके मन में आपके लिए  गलत धारणा बन जाती है .. और रिश्तो में संबंधो में दरार जाती है , क्योंकि अपरिचित और क्रोध और नफरत और अहंकार में डूबी हुई भाषा और आवाज़ दोनों ही सीधे दिल पर असर करते है ...

कबीर ने भी कहा है की  "ऐसी वाणी बोलिए,मन का आपा खोय। औरों को शीतल करे,आपहु शीतल होय."  

जीवन क्षणभंगुर है ..मित्रो किसी को  और कुछ याद रहे या न रहे ,आपकी बाते खूब याद रहती है ... इसलिए आज से ये महामंत्र याद रखिये और पालन कीजिये .. की दूसरो के साथ अच्छा करे , अच्छे से रहे और सबसे ऊपर , अच्छे से बोले.. क्योंकि.... nothing really lasts forever.
प्रणाम .

Sunday, November 21, 2010

आईये धन्यवाद दे.......!!!


आईये धन्यवाद दे अपनी माता पिता को जिन्होंने  हमें जन्म दिया और हमें पाला पोसा .


फिर धन्यवाद दे धरती माता को जो हमारा भार सह रही है और हमें जीने के लिए संसाधन देती है.


फिर धन्यवाद दे नदियों को जो हमें पानी देते है.


फिर धन्यवाद दे खेतो को और किसानो को जो हमें अनाज देते है.


फिर धन्यवाद दे उन सभी पेड़ पौधों को और जड़ी बूटियों को जो हमें फल,फूल और औषधि देते है.


फिर धन्यवाद दे चन्द्रमा और तारो को जो की हमें रौशनी देते है , जब सुरज डूब जाता है.


फिर धन्यवाद दे सूरज को जो हम पर कृपा भाव रखकर हमें सिर्फ रौशनी देता है.


और सबसे अंत में धन्यवाद देवे उस परमपिता ईश्वर को जो बिना कहे ही हमारे दुखो को दूर करता है और हमें ज़िन्दगी जीने का एक महान अवसर देता है.



प्रणाम !!!!



Saturday, September 4, 2010

धार्मिकता से आध्यात्मिकता




धर्म भगवान के नाम पर एक व्यर्थ की कवायद है. जिससे सिर्फ हानि ही हुई है, मानवता की और कुछ नहीं . मानव जाती पर धर्म एक बहुत बड़ा धब्बा है.

मैंने कहीं पढ़ा है कि धर्म के नाम पर, युद्ध से भी ज्यादा लोग मारे गए हैं. ये एक  शर्म की बात है, भगवान ने कभी भी नहीं कहा होंगा की धर्म
  के नाम पर हत्याए करो , या धार्मिक बनाओ , या मेरी पूजा करो . लेकिन सारे संसार के सारे धार्मिक नेताओ ने सिर्फ यही एक काम किया है की ज्यादा से ज्यादा लोगो को धार्मिक बनाया जाए.

अब सही अर्थो में जरुरत है की धर्म से आध्यात्मिकता में रूपांतरण हो . जो कोई भी धर्म हो, जो कोई भी भगवान या अवतार हो ,  हम सरल एजेंडा भूल रहे हैं की सभी इंसानों के बीच प्यार और अधिक दोस्ती  हो . हमारे पास लड़ने के अधिक कारण है , बनिस्पत की प्यार के और दोस्ती के. ये मानव युग की और समाज की एक व्यथा ही है.

भगवान तथा भगवान को समर्पित सारे धर्म ग्रंथों और पुस्तकों का एक ही सार है की हम एक दूजे से प्रेम करे , मित्रता का भाव रखे .

मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है.  आईये हम ये प्रण करे की हम धार्मिक से ज्यादा आध्यात्मिक हो , भगवान की creations के प्रति हम प्रेम का भाव रखे , प्रकृति की ओर ध्यान दे, जो हमें जीवन देते है , उन संसाधनों की रक्षा
करे. एक दूसरे को प्यार करे  एक दूसरे की  मदद करे . हम पहले इंसान बने , फिर बाद में ही  एक आदमी या एक औरत.  यही असली धार्मिक प्रयास है और यही भगवान की असली पूजा है .

प्रणाम !!!


Tuesday, August 31, 2010

प्रेम पाने के लिए प्रेम करे....खुद से तथा औरो से !!!


यदि आप चाहते हैं की आपको लोग प्यार करे . तो ये बहुत आसान है, पहले आप खुद को प्रेम करो और फिर बाद में दूसरो को . आप हैरान होंगे कि आपको लोग पहले से ज्यादा प्यार कर रहे है .

सबसे पहले व्यक्ति आप हो , जिसे आपने प्यार करना चाहिए .

तो पहले आप अपने जीवन से प्यार करिए . आपके जीवन में चुनौतियों हो सकती है, हो सकता है की आपके जीवन में कोई खुशी न हो, हो सकता है की परिस्थितिया विपरीत हो और हो सकता है बहुत सी ऐसी समस्याये हो जिनके तत्काल हल दिखाई नहीं दे रहे हो . लेकिन फिर भी आप अपने आपको प्यार कर सकते है ..क्योंकि ये आपका जीवन है और अगर आप इसे प्यार नहीं करते तो कोई और आपको प्यार नहीं करेंगा .

एक बार जब आप खुद को प्रेम करना शुरू कर देंगे , दुसरो के लिए भी प्रेम का जन्म होना शुरू हो जायेंगा. आप दुसरो के लिए फिक्रमंद होवे , सहायक होवे, संवेदनशील होवे, और प्रेम करे. सिर्फ निश्चल प्रेम करे .और यकीन मानिए की दूसरों को प्रेम करना हमारे विचारों की तुलना में कहीं ज्यादा आसान है.

यह बहुत महत्वपूर्ण है की हम बिना शर्त प्रेम करे. किसी भी तरह की अपेक्षा नहीं रखे . और यही प्यार आपको परमेश्वर और आध्यात्मिकता के पथ पर ले जाएगा.

तो दोस्तों. कृपया अपने आपको और दूसरो को प्रेम करे और दूसरो से प्रेम पाये.

और हमेशा की तरह भगवान् तो आपसे प्रेम करते ही है .

प्रणाम !!

Thursday, August 26, 2010

HRUDAYAM


दोस्तों , अध्यात्म पर मेरा नया ब्लॉग प्रस्तुत है .. 

http://hrudayam-theinnerjourney.blogspot.com/
आपसे निवेदन है की इसे जरुर FOLLOW करे .. 

आपका 
विजय

Monday, July 19, 2010

दिल और दिमाग.... HEART AND MIND ...


प्यारे दोस्तों, मुझे एक साधारण सी बात आपको बताना है कि, ये हम ही होते है , जो जीवन और भगवान की सुंदरता को अनदेखा करते है ...ये कार्य जाने अनजाने में होता है और ये होता है हमारे दिमाग के हस्तक्षेप के कारण !!! दिमाग का अपना तरीखा होता है जीवन जीने की प्रक्रिया को निर्धारित करने का ...और ये करता है अपने आसपास चीज़ों को देखकर और इनकी तुलना हमारे मस्तिष्क में मौजूद हमारे अतीत की छवियों और इनसे जुडी हुई धारणाओं के कारण !!! इस पूरी प्रक्रिया में जीवन खराब हो जाता है और हमारे जीवन को ख़राब करने के लिए दिमाग सहायता लेता है तर्कों की , कल्पनाओं की , धारणाओं की और यादों की .. ये सब कुछ मिलकर हमें रोक देते है की हम अपना वास्तविक जीवन को प्रेमपूर्वक देखे ... और भगवान के द्वारा बनाई गई प्रकृति का आनंद नहीं ले पाते है . तो बस अपने दिल का पालन करें, क्योंकि जब दिमाग रुक जाता है, तो जीवन शुरू होता है और जब जीवन बढ़ता है, तो प्यार होता है और जब प्यार किसी सुन्दर फूल की तरह खिलेंगा तो वो एक आनंद का क्षण होगा, खुशी का पल होंगा और आत्मा की सबसे अच्छी गूँज होंगी .. सबसे बढ़िया दिल की धड़कन होंगी .... और हमें लगता है की पृथ्वी पर सबसे सुन्दर घटना सिर्फ हमारा जीवन ही है .... और बहुत ही आश्चर्य की बात की आपके सभी सपनों को हकीकत में बदलते हुए आपका जीवन आपके साथ रहेंगा.... इसलिए सिर्फ अपने दिल की बातो का पालन करे ...जीवन आपकी राह देख रहा है दोस्तों ... आप सबको भगवान का आशीर्वाद मिले ... ..!!!


Dear Friends, let me tell you one simple thing that, it is only we, who overlook the beauty of life and GOD; just because of intervention of our mind. Mind has its own way of looking at the things around and than it shapes our life based on the images of our past experience and other mechanical inputs. In the process the life gets deteriorated and spoiled and get covered by logics, imaginations, perceptions and memories. All this put together stops us to see the real life and what it is for us in the whole scenario created by GOD. So simply Please follow your heart because when mind stops, life begins and when life grows, love happens and when love blossoms; than that will be the moment of bliss , the moment of joy and the most happening heartbeat of soul…..life is just than most happening thing on the earth ...and very surprisingly it will be your own life full of all the dreams converted into reality. So believe, follow and mind your HEART. HAPPY LIVING FRIENDS…….!!! GOD BLESS YOU …..!!!


Saturday, July 17, 2010

I , ME AND MYSELF !!!

There is no past and no future , whatever is there , it is only the present ...the moment .. the drop of life .. the bliss of soul...the blessings of GOD....the being ...the ME... and I am living every moment of my life with Music , books, and good friends like you... Thanks for being my friends. I cherish the memories...I will soon comeback after the shoulder enjury ...soon ..very soon !!! That's my promise to me and you all.

Saturday, March 13, 2010

दुखो का मूल कारण - अपेक्षा और उपेक्षा

प्रिय मित्रो ;
नमस्कार .
आज  सोचा की दुखो का मूल कारण क्या है ,जिनके वजह से सारे मनुष्य जाती को दुःख भोगना पड़ता है ....तो ये समझ में आया की दुखो का मूल कारण सिर्फ और सिर्फ दो  ही है - एक तो अपेक्षा और दूसरी उपेक्षा !!! सारे संसार में उत्पन्न हुए दुखो का यही दो कारण है या तो हम किसी से बहुत से विषय और वासनाओ की अपेक्षा कर लेते है और या तो हम किसी की उपेक्षा करते है ...और इसका उल्टा भी है जो दुःख देता है ....या तो कोई हमसे अपेक्षा कर लेता है या हम किसी की उपेक्षा कर लेते है ........ अपेक्षा सिर्फ आसक्ति और विषय -वासना और चाहत  और needs के amplification की वजह से उत्पन्न होती है और जब हमारी चाहते पूरी नहीं हो पाती है तो हमें दुःख पहुँचता है ...चाहे वो फिर किसी  भी form   में हो ..और अपेक्षाए होना या उनकी आशाये रखना ,मानव मन  की स्वाभाविक कमजोरी है ...लेकिन यदि हम ये सोच ले --किसी भी आशा के पहले या अपेक्षा के पहले की यदि ये आशाये या अपेक्षाए पूरी न हो तो हमें दुखी नहीं होना है बल्कि एक नयी ऊर्जा के साथ जीवन को गतिशील रखना है ...निरंतरता बनायीं रखनी है ....क्योंकि अक्सर सपने पूरे होते ही है .....भले ही थोड़ी देर लगे .... साथ ही हमें ये भी कोशिश करना होंगा की यदि कोई हमसे किसी भी प्रकार की अपेक्षा रखता है तो उसे यथासंभव पूरा करे... क्योंकि दूसरो के सपने जो आपसे जुड़े हुए है उन्हें यथासंभव पूरा करने की एक human responsibility हमारी भी बनती है ......

उपेक्षा भी इसी तरह दुःख देती है ...यदि कोई भी  किसी भी कारण की वजह से हमारी उपेक्षा करता है तो हमें दुःख होता है ,इसी तरह से यदि हम किसी की उपेक्षा करते है तो वो दुखी होता है .... उपेक्षा directly प्रेम और मित्रता के भाव का अपमान है .....शब्दों का सही इस्तेमाल उपेक्षा को कटुता से बचा सकता है ....लेकिन जहाँ  तक संभव हो सके किसी की उपेक्षा नहीं करना चाहिए .....

मानव जन्म इतना सुन्दर है की उसे दुखो से लाद कर दुखी नहीं करना चाहिए ....

प्रणाम !!!

Saturday, January 16, 2010

माँ = ईश्वर


दोस्तों , इस दुनिया में ईश्वर का सच्चा स्वरुप सिर्फ माँ ही है ... इस संसार में किसी ने भी ईश्वर को मूर्त रूप में नहीं देखा है ,लेकिन सबने अपनी माँ को देखा है ..लेकिन ये न समझ सके की , संसार में ईश्वर मूर्त रूप में माँ में समाये हुए है .. ईश्वर हमारे लिए जो सारे कार्य करते है , वो सभी एक माँ करती है .. जन्म देना , पालना, पोसना, जीवन सीखना, पढ़ाना और लिखाना , बिमारी में देखभाल करना , संसार को समझने का ज्ञान देना !

हमारे शरीर को अपने दूध और रक्त से सींचना और एक छोटे से पौधे को एक वटवृक्ष की तरह बड़ा करना ...और अच्छी बातो से जीवन की समझदारी से मन को भरना ... ये सब कुछ एक माँ ही तो करती है .. लेकिन क्या हम अपनी माँ को भूल तो नहीं गए , इस दुनिया की झूठी RAT-RACE में ...

ईश्वर साक्षात् हमारे सम्मुख रहता है माँ के रूप में और हम संसार में ढूंढते रहते है .. माँ को प्रेम करिये ..क्योंकि उसका आदर और प्रेम ही ईश्वर की सच्ची पूजा अर्चना है .. दुनिया में सारे रिश्ते एक तरफ और माँ और बच्चो का रिश्ता एक तरफ .. क्योंकि माँ निस्वार्थ भाव से अपने बच्चो की सेवा में , उनकी भलाई में लगी रहती है ...

बीते दिनों मेरे पास एक CIRCULATING MAIL आया , आपके पास भी आया ही होंगा, किसी अज्ञात ने लिखा है और क्या खूब लिखा है , मैं उस अज्ञात को प्रणाम कर , उस मेल को नीचे RE-PRODUCE कर रहा हूँ ... बस आप सब से विनंती है की , सबको भले ही भूल जाए , पर माँ को न भूले....




माँ = ईश्वर

When you came into the world, she held you in her arms.
You thanked her by wailing like a banshee.

When you were 1 year old, she fed you and bathed you.
You thanked her by crying all night long.

When you were 2 years old, she taught you to walk.
You thanked her by running away when she called.

When you were 3 years old, she made all your meals with love.
You thanked her by tossing your plate on the floor.

When you were 4 years old, she gave you some crayons.
You thanked her by colouring the dining room table.

When you were 5 years old, she dressed you for the holidays.
You thanked her by plopping into the nearest pile of mud.

When you were 6 years old, she walked you to school.
You thanked her by screaming, "I'M NOT GOING!"

When you were 7 years old, she bought you a baseball.
You thanked her by throwing it through the next-door-neighbour’s window.

When you were 8 years old, she handed you an ice cream.
You thanked her by dripping it all over your lap.

When you were 9 years old, she paid for piano lessons.
You thanked her by never even bothering to practice.

When you were 10 years old, she drove you all day, from soccer to gymnastics to one birthday party after another.
You thanked her by jumping out of the car and never looking back.

When you were 11 years old, she took you and your friends to the movies.
You thanked her by asking to sit in a different row.

When you were 12 years old, she warned you not to watch certain TV shows.
You thanked her by waiting until she left the house.

When you were 13, she suggested a haircut that was becoming.
You thanked her by telling her she had no taste.

When you were 14, she paid for a month away at summer camp.
You thanked her by forgetting to write a single letter.

When you were 15, she came home from work, looking for a hug.
You thanked her by having your bedroom door locked.

When you were 16, she taught you how to driver her car.
You thanked her by taking it every chance you could.

When you were 17, she was expecting an important call.
You thanked her by being on the phone all night.

When you were 18, she cried at your high school graduation.
You thanked her by staying out partying until dawn.

When you were 19, she paid for your college tuition,drove you to campus, carried your bags.
You thanked her by saying good-bye outside the dorm so you wouldn't be embarrassed in front of your friends.

When you were 20, she asked whether you were seeing anyone.
You thanked her by saying, "It's none of your business."

When you were 21, she suggested certain careers for your future.
You thanked her by saying, "I don't want to be like you."

When you were 22, she hugged you at your college graduation.
You thanked her by asking whether she could pay for a trip to Europe.

When you were 23, she gave you furniture for your first apartment.
You thanked her by telling your friends it was ugly.

When you were 24, she met your fiancé and asked about your plans for the future.
You thanked her by glaring and growling, "Muuhh-ther, please!"

When you were 25, she helped to pay for your wedding, and she cried and told
you how deeply she loved you.
You thanked her by moving halfway across the country.

When you were 30, she called with some advice on the baby.
You thanked her by telling her, "Things are different now."

When you were 40, she called to remind you of a relative's birthday.
You thanked her by saying you were "really busy right now."

When you were 50, she fell ill and needed you to take care of her.
You thanked her by reading about the burden parents become to their children.

And then, one day, she quietly died. And everything you never did came
crashing down like thunder.

Let us take a moment of the time just to pay tribute/show appreciation to
the person called MOM though some may not say it openly to their mother.
There's no substitute for her. Though at times she may not be the best of friends, may not agree to our thoughts, she is still your mother!!!
She will be there for you...to listen to your woes, your braggings, your
Frustrations, etc. Ask yourself.....have you put aside enough time for her, to listen to her "blues" of working in the kitchen, her tiredness???

Once gone, only fond memories of the past and also regrets will be left.

*DON'T TAKE FOR GRANTED THE THINGS CLOSEST TO YOUR HEART. CLING TO THEM AS YOU WOULD YOUR LIFE, FOR WITHOUT THEM, LIFE IS MEANINGLESS*

If she's still around,
never forget to love Her more than ever.
And if she's not,
remember Her unconditional love.

Always remember to love YOUR MOTHER,
because you only have one mother in your lifetime.