Wednesday, February 20, 2013

तुम्हारा जीवन तुम पर निर्भर है.....ओशो


तुम्हारा जीवन तुम पर निर्भर है.....ओशो

न कोई कर्म, न कोई किस्मत, न कोई ऐतिहासिक आदेश- तुम्हारा जीवन तुम पर निर्भर है। उत्तरदायी ठहराने के लिए कोई परमात्मा नहीं, सामाजिक पद्धति या सिद्धांत नहीं है। ऐसी स्थिति में तुम इसी क्षण सुख में रह सकते हो या दुख में।
स्वर्ग अथवा नरक कोई ऐसे स्थान नहीं हैं जहाँ तुम मरने के बाद पहुँच सको, वे अभी इसी क्षण की संभावनाएँ हैं। इस समय कोई व्यक्ति नरक में हो सकता है, अथवा स्वर्ग में। तुम नरक में हो सकते हो और तुम्हारे पड़ोसी स्वर्ग में हो सकते हैं।

एक क्षण में तुम नरक में हो सकते हो और दूसरे ही क्षण स्वर्ग में। जरा नजदीक से देखो, तुम्हारे चारों ओर का वातावरण परिवर्तित होता रहता है। कभी-कभी यह बहुत बादलों से घिरा होता है और प्रत्येक चीज धूमिल और उदास दिखाई देती है और कभी-कभी धूप खिली होती है तो बहुत सुंदर और आनंदपूर्ण लगता है।

ओशो

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