Friday, October 14, 2011

मन के पाँव.....!!!


प्रिय मित्रों ;

मन के दो पाँव होते है .. एक अतीत में और दूसरा भविष्य में . , और यही सबसे ज्यादा गडबडी होती है , क्योंकि मन कभी भी वर्तमान में नहीं जीना चाहता है . या तो वो अतीत की बातो से खुश या दुखी होते रहता है या फिर भविष्य की कल्पनाओं में उलझा होता है . और चूँकि इस मन का अस्तित्व हममे  होता है ,हमारा पूरा जीवन इस मन की वजह से प्रभावित होते रहता है .

अब सवाल उठता है कि क्या करे. कैसे इस मन को काबू में करे. ये इस संसार का सबसे कठिन काम है . मन की चंचलता उसे काबू में नहीं होने देती .

मैं एक सुन्दर सा उपाय बताता हूँ , जो कि मैं आजमाता हूँ .और वो उपाय है मन में अपने आपको नहीं उलझने देना. जितना आप इसको रोकने की कोशिश करेंगे , उतना ही ये उपद्रव करेंगा . आप इसे छोड़ दीजिए . शांत होने की कोशिश करे. और इससे अलग होने की चेष्ठा करे. आपका ध्यान मन से हटते ही मन शांत हो जायेंगा . और फिर आप वर्तमान को सुन्दर और स्वस्थ बना सकते है .. थोडा समय लगेंगा , लेकिन ये होंगा जरुर . और एक बार आपने इसे कर लिया तो बस फिर कोई बात ही नहीं ...!!!

आपका जीवन शुभ हो , यही मंगल कामना है

आपका
विजय

4 comments:

वन्दना said...

बहुत सुन्दर आलेख्।

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

विचारणीय लेख

राजन इकबाल said...

आपके विचार पढ़ के काफी अच्छा लगा

mridula pradhan said...

bahot achche.....