Friday, January 27, 2012

सुख और दुःख


मेरे प्रिय ह्रदयम मित्रो :

सुबह की शुद्ध सुर्यकिरनो  के साथ आपका ह्रदयम पर स्वागत करता हूँ.
पिछले दिनों मुझे एक मित्र ने पुछा ," स्वामी जी , इस जगत में अच्छे लोगो को ही दुःख ज्यादा क्यों होते है ? इसका उत्तर दिजियेंगा ! "

मैंने उन्हें दो उत्तर दिए जो मैं आप सबके साथ बाँट रहा हूँ .


पहला उत्तर : प्रिय मित्र . ये ईश्वर के द्वारा बनाया गया DEFAULT MECHANISM है  ,स्वंय भगवान भी जब मनुष्य रूप में यहाँ अवतरित हुए , तो उन्हें भी दुःख भोगना पढ़ा .
ज़हर ,सुकरात को ही पीना पढ़ा था
सूली पर जीसस को ही चढ़ना पढ़ा था
वनवास में श्री राम को ही जाना पढ़ा था .
ईश्वर की बनायी हुई इस दुनिया में युगों युगों से ये घटित हो रहा है , कि अच्छे इंसानों को ही दुःख ज्यादा प्राप्त होते है और उन्हें ही असमय मृत्यु को स्वीकार करना पढता है .

दूसरा उत्तर : मित्र , हम सब एक अजीब से MENTAL PERCEPTIONS  के साथ जी रहे है . दरअसल जो दुःख अच्छे लोगो को प्राप्त होते है , वो दुःख बुरे लोगो भी प्राप्त होते है लेकिन जहाँ बुरे लोगो को ये दुःख जीवन की अन्य घटनाओं की तरह एक और घटना प्रतीत होती है , क्योंकि वे खुद बुरे कार्यो में लिप्त रहते है . वहीँ अच्छे लोगो को ये दुःख कचोटते है और तकलीफ देते है . दूसरी बात , कि जिस तरह से  अच्छे लोग और बुरे लोगो  की विवेचना हम खुद करते है , अच्छे और बुरी घटना की विवेचना भी हम खुद करते है . दरअसल अदालत हम खुद ही बनाते है और सजा भी खुद ही देते है .

इसलिए इस संसार में , भाग्य से हमें जो भी मिलता है उसे ईश्वर का प्रसाद ही समझ कर उसे ग्रहण कर लेना चाहिए और जीना चाहिए .
जिस तरह से जीसस ने सूली पर चढ़ना  स्वीकार किया .
जिस तरह से श्री राम ने वनवास पर जाना स्वीकार किया .
उसी तरह से हमें जो भी घटित होता है , उसे अपने भाग्य और जीवन का एक हिस्सा समझ कर जीवन के अगले क्षण की ओर अग्रसर होना चाहिए .

प्रणाम

प्रेम तथा जीवन से भरे आलिंगनो के साथ
आपका
विजय

 

2 comments:

Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर विश्लेषण...आभार

sushma 'आहुति' said...

बहुत खुबसूरत रचना अभिवयक्ति.........